Father’s day’s poem

आपने अपने बचपन में जो कुछ भी देखा , चाहे आपका संघर्ष हो या बचपन  साइकिल सीखा हो , बड़ी मुश्किल हुई होंगी ,

आज हम अपने बचपन को देखते हैं तो हमारे आंखो के सामने एक चेहरा नजर आता हैं वह पापा , जिन्होंने कभी हमें किसी चीज के लिए ना नहीं कहा , चाहे जेब उनकी खाली ही क्यों ना हो , पता नहीं बचपन कब गुजर गया , वो मस्ती ओर शरारतें भरी सुबह , शाम दोस्तो के संग हो या पापा के संग खेत खलिहान में , आज पता नहीं पैसे कमाने के लालच ने हमें अपने पापा से दूर कर दिया हैं ,

जब स्कूल की क्लास में अच्छे नंबर ले आते थे तो पापा कभी हमारी प्रशंसा नहीं करते थे शायद उनको लगता था कि मैं बिगड़ ना जाऊं , आज जब भी बचपन की यादों को देखता हूं , तो पापा को नहीं समझ पाता हूं क्योंकि वे हमेशा परिवार के लिए कमाते थे चाहे सर्दी , धूप, हो बारिश , उनको हमेशा हमारी चिंता रहती थीं

आज उनके के लिए छोटी सी कविता ,

मेरे पिताजी की एक छोटी सी कहानी

प्यार का सागर ले आते
फिर चाहे कुछ न कह पाते
बिन बोले ही समझ जाते
दुःख के हर कोने में
खड़ा उनको पहले से पाया
छोटी सी उंगली पकड़कर
चलना उन्होंने सीखाया
जीवन के हर पहलु को
अपने अनुभव से बताया
हर उलझन को उन्होंने
अपना दुःख समझ सुलझाया
दूर रहकर भी हमेशा
प्यार उन्होंने हम पर बरसाया
एक छोटी सी आहट से
मेरा साया पहचाना,
मेरी हर सिसकियों में
अपनी आँखों को भिगोया
आशिर्वाद उनका हमेशा हमने पाया
हर ख़ुशी को मेरी पहले उन्होंने जाना
असमंजस के पलों में,
अपना विश्वाश दिलाया
उनके इस विश्वास को
अपना आत्म विश्वास बनाया
ऐसे पिता के प्यार से
बड़ा कोई प्यार न पाया. हैप्पी फादर डे. 🙏🙏

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